ऋषिकेश वन भूमि प्रकरण: आईडीपीएल से तहसील परिसर तक निकली “ऋषिकेश बचाओ महारैली” हजारों लोगों हुए शामिल

ऋषिकेश।
नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत शिवाजी नगर, 20 बीघा, मीरा नगर, मंसा देवी, अमित ग्राम आदि इलाकों में बसे हजारों लोगों ने वन भूमि प्रकरण में अपनी आवाज और ज्यादा बुलंद करते हुए आईडीपीएल से तहसील परिसर तक करीब आठ किलोमीटर पैदल ऋषिकेश बचाओ महारैली निकली। इस रैली में करीब 20 हजार लोग शामिल हुए है। रैली में भाजपा, कांग्रेस, हिन्दू शक्ति संगठन, बापूग्राम बचाव संघर्ष समिति सहित कई संगठन भी शामिल हुआ। रैली के बाद अपनी मांगों के संबंध में एसडीएम को ज्ञापन दिया। मुख्य रूप से वन भूमि को डिफॉरेस्ट करने और मूलभूत सुविधाओं को सुचारू रूप से देने की मांग ज्ञापन में राज्य और केंद्र सरकार से की गई। बता दें कि अपनी इन मांगों को लेकर पिछले चार हफ्तों से बापू ग्राम संघर्ष समिति के बैनर तले सांकेतिक धरना बापू ग्राम में चल रहा है। इस धरने पर तमाम राजनीतिक, सामाजिक और व्यापारिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि पहुंचकर अपना समर्थन भी देने में लगे हैं। प्रतिनिधियों का दावा है कि वह इस विकट घड़ी में जनता के तन मन और धन के साथ खड़े हैं और सरकार से मांग करते हैं कि वह भी जनता हित में खड़ी हो और कैबिनेट में वन भूमि को डिफॉरेस्ट करने का प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेजें। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट में जनता हित को लेकर कड़ी पैरवी भी करें। वहीं धरना स्थल पर कुछ लोगों का दावा है कि जिन जमीनों को वन भूमि बताकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है वह वन भूमि है या नहीं इस पर संशय है। क्योंकि इन जमीनों पर महात्मा गांधी की शिष्य मीरा बेन ने उनके बुजुर्गों को आजादी से पहले ही बसा दिया था।
. क्या है पूरा मामला
ऋषिकेश के शिवाजीनगर, बापूग्राम, मनसा देवी, मीरा नगर सहित अन्य इलाकों में 2866 एकड़ वन भूमि पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया था क्षेत्र में वन विभाग की खाली पड़ी भूमि पर कब्जा लिया जाए। जिसके बाद मामला गरमा गया और भूमि स्वामियों ने वन विभाग का विरोध करना शुरू कर दिया। मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस, वन और स्थानीय लोगों के बीच बात पथराव तक पहुंच गई। इसके बाद पुलिस प्रशासन द्वारा कई नामजद और अज्ञात पर मुकदमे भी दर्ज किए गए।
जिसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को दो हफ्ते का समय दिया था।
समय सीमा में वन भूमि की विस्तृत जानकारी और भूमि पर बसे लोगों की संख्या बताने के दिए आदेश।
किस तरह के निर्माण हुए हैं उनका डाटा भी उपलब्ध कराने के लिए कहा
खाली भूमि के सर्वे की रिपोर्ट सौंपने के दौरान सरकारी वकील को लगाई फटकार।
सरकारी वकील ने दिया जवाब अतिक्रमण हटाने की कोशिश की थी लेकिन हिंसा होने से आई बाधा।
इस पर जज साहब ने पूछा 23 साल तक कहां सो रहे थे, अब कोर्ट के आदेश की आड़ लेकर लोगों को बेघर करना चाहते हो
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, राज्य सरकार की मशीनरी पूरी तरह हो गई फेल, अधिकारियों की लापरवाही नहीं बल्कि यह है उनकी मिली भगत
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद वन भूमि पर बस से हजारों लोगों में मचा है हड़कंप।
पूरे प्रकरण के बाद कुछ स्थानीय और जनप्रतिनिधि ने मिलकर बापूग्राम बचाव संघर्ष समिति बनाई और शांतिपूर्वक ढंग से अपनी मांगों को पूरा करने को लेकर धरना दे रहे है। इसी कड़ी में आज महारैली निकली गई है।



