नाबालिग से छेड़छाड़ और अपहरण की कोशिश में आरोपी दोषी, चार धाराओं में तीन-तीन साल की सजा

ऋषिकेश क्षेत्र में 15 साल की नाबालिग का पीछा, छेड़छाड़ और जबरन निर्माणाधीन मकान में खींचने की कोशिश के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया है। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो) की न्यायाधीश मंजू सिंह मुंडे ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को चार धाराओं में तीन-तीन साल के साधारण कारावास और 10-10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और जुर्माना जमा नहीं करने पर एक-एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। फैसला सुनाने के बाद अदालत ने आरोपी की जमानत निरस्त कर उसे न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया।
जन्मदिन की पार्टी से लौट रही थी नाबालिग, रास्ते में किया पीछा
घटना 15 अगस्त 2023 की रात करीब 8:45 बजे की है जब ऋषिकेश के श्यामपुर क्षेत्र में रहने वाली 15 वर्षीय नाबालिग पड़ोस में अपनी सहेली की जन्मदिन पार्टी से अकेले घर लौट रही थी। आरोप था कि इसी गली में रहने वाले रवि बफिला ने उसका पीछा किया। उसने नाबालिग का हाथ पकड़कर जबरदस्ती की और मुंह बंद कर उसे पास के एक निर्माणाधीन मकान में खींचने की कोशिश की। जिससे नाबालिग किसी तरह छूटकर घर पहुंची और अपने माता-पिता को घटना की जानकारी दी।
मां की शिकायत पर दर्ज हुआ था मुकदमा
घटना के अगले दिन 16 अगस्त 2023 को नाबालिग की मां ने श्यामपुर पुलिस चौकी में शिकायत दी। इसके बाद 20 अगस्त 2023 को मामले में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने आरोपी को सीआरपीसी की धारा 41(1) के तहत नोटिस दिया था। बाद में आरोपी ने 8 फरवरी 2024 को अदालत में आत्मसमर्पण किया जहां से उसे जमानत मिल गई थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान वह जमानत पर ही रहा।
सात गवाहों के बयान बने अभियोजन का आधार
मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। इनमें पीड़िता, उसकी मां, स्कूल के क्लर्क संदीप सिंह रावत, चिकित्सक डॉ. शिवानी ध्यानी और दोनों विवेचक उपनिरीक्षक नमिता सैनी व सरोज नौटियाल शामिल थे। हेड कांस्टेबल पुनीत सिंह ने भी गवाही दी। स्कूल के क्लर्क ने पीड़िता की जन्मतिथि से संबंधित दस्तावेज दिए जबकि चिकित्सक और विवेचकों के बयान भी अदालत में दर्ज किए गए। जिसके बाद मामले में अंतिम फैसला सुनाया गया।
चार धाराओं में सुनाई सजा
अदालत ने आरोपी रवि को आईपीसी की धारा 354-ए और 354-डी तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 7/8 और 11/12 के तहत दोषी करार देते हुए प्रत्येक धारा में तीन साल का साधारण कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माना लगाया। जिसमे सभी सजाएं एक साथ चलेंगी जबकि जुर्माना अदा नहीं करने पर प्रत्येक धारा में एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोषसिद्धि के बाद अदालत ने आरोपी की जमानत रद्द कर उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।



