तुंगनाथ मंदिर को बचाने के लिए रुड़की सीबीआरआई ने संभाली कमान, विशेषज्ञों की टीम पहुंची तुंगनाथ मंदिर

विश्व के सबसे ऊंचे और 1000 वर्ष पुराने शिव मंदिरों में शुमार तुंगनाथ मंदिर के संरक्षण को लेकर बडी और राहत भरी खबर सामने आई है।
करीब एक हजार वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक धरोहर में आए संरचनात्मक झकाव का अब वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को केंद्रीय भवन अनु्संधान संस्थान यानी CBRI रुडकी ने अपने हाथों में लिया है। सीबीआरआई रुडकी के निदेशक प्रोफेसर आर. प्रदीप कमार ने बताया कि समय के साथ तुंगनाथ मंदिर की संरचना में झुकाव और बदलाव के संकेत मिलने ‘के बाद विशेषज्ञों ने इसका गहन तकनीकी अध्ययन किया। अध्ययन ‘के आधार पर अब मंदिर का वैज्ञानिक स्ट्रक्चरल ट्रीटमेंट किया जाएगा। CBR[ के विशेषज्ञ आधूनिक इंजीनियरिंग तकनीकों की मदद से मंदिर की नींव, पत्थरों और पूरी संरचना को मजबूत एवं स्थिर करने का कार्य करेंगे। सबसे खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में मंदिर की ऐतिहासिक, धार्मिक और वास्तु पहचान को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ मरम्मत का कार्य नहीं,बल्कि विरासत संरक्षण का वैज्ञानिक अभियान है। उपचार के प्रत्येक चरण की लगातार तकनीकी मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि मंदिर की मूल संरचना को बिना किसी नुकसान के लंबे समय तक सरक्षित रखा जा सके। आस्था, इतिहास और वैज्ञानिक तकनीक के इस अनूठे संगम से उम्मीद है कि विश्व प्रसिद्ध तुंगनाथ मंदिर आने वाले कई दशकों तक सुरक्षित रहेगा हजार साल पुरानी इस धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में CBRI की यह पहल एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।
प्रोफेसर आर. प्रदीप कुमार निदेशक सीबीआरआई रुड़की
