पेड़ बचाने की मुहिम से सुर्खियों में आईं मानवी अनुषा, सिर मुंडवाकर जताया था विरोध, अब वीडियो और बयानों को लेकर हो रही ट्रोलिंग

ऋषिकेश।
पिंकी कश्यप: भनियावाला-जौलीग्रांट-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना के तहत हजारों पेड़ों की कटाई के विरोध में प्रमुख चेहरा बनकर सामने आईं मानवी अनुषा अब सोशल मीडिया पर तीखी बहस का विषय बन गई हैं। पेड़ों की कटाई के विरोध में सिर मुंडवाने के बाद वायरल हुई मानवी को लेकर अब सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक वर्ग उन्हें पर्यावरण संरक्षण की मजबूत आवाज बता रहा है, जबकि दूसरा वर्ग उन्हें निशाने पर लेते हुए तरह-तरह के आरोप लगा रहा है।

सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे गंभीर आरोप
सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर कुछ लोग मानवी अनुषा को “ढोंगी” और “फ्रॉड” बताने वाले पोस्ट साझा कर रहे हैं। कुछ यूजर्स का आरोप है कि साध्वी के वेश में रहने वाली मानवी कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग करती हैं और सनातन धर्म के खिलाफ बयान देती हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, बड़ी संख्या में लोग उनके पर्यावरण संरक्षण अभियान का समर्थन करते हुए उनके साहस और त्याग की सराहना भी कर रहे हैं।

सिर मुंडवाकर जताया था विरोध
पेड़ों की कटाई के विरोध के दौरान मानवी अनुषा ने सार्वजनिक रूप से अपना सिर मुंडवाकर विरोध दर्ज कराया था। उनका भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें वह रोते हुए कह रही थीं कि पेड़ पृथ्वी का श्रृंगार हैं और यदि सरकार उन्हें “गंजा” कर रही है तो महिलाओं को भी विरोध स्वरूप अपने सिर मुंडवा लेने चाहिए। इस वीडियो के बाद देशभर में उनके कदम की चर्चा हुई और पर्यावरण संरक्षण को लेकर नई बहस छिड़ गई।

कौन हैं मानवी अनुषा?
रिपोर्ट्स के अनुसार मानवी अनुषा, जिन्हें “माना” के नाम से भी जाना जाता है, अध्यात्म गुरु, वैदिक ज्योतिषी और डिजाइनर हैं। वह दिल्ली से “आऊ माना फाउंडेशन” संचालित करती हैं तथा ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम क्षेत्र में एक ध्यान केंद्र चलाती हैं। बताया जाता है कि उनके पास एमबीए (फाइनेंस और मार्केटिंग), निफ्ट (NIFT) से डिजाइन की डिग्री, फिल्म मेकिंग और एक्टिंग की शिक्षा तथा अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी (UCLA) से भी अध्ययन का अनुभव है। उनके ध्यान केंद्र से हजारों लोग जुड़े होने का दावा किया जाता है।

अध्यात्म की ओर कैसे बढ़ा रुझान
मानवी के अनुसार 16 वर्ष की आयु में उनके पिता ने उन्हें ओशो की एक पुस्तक पढ़ने के लिए दी थी। उसी के बाद अध्यात्म के प्रति उनकी रुचि बढ़ी। 20 वर्ष की उम्र में पिता के निधन के बाद उनका झुकाव पूरी तरह आध्यात्मिक जीवन की ओर हो गया। बाद में 36 वर्ष की उम्र में उन्होंने परिवार छोड़कर ऋषिकेश का रुख किया और अपने गहने बेचकर ध्यान केंद्र की शुरुआत की।

समर्थकों और विरोधियों के बीच तेज हुई बहस
मानवी अनुषा को लेकर सोशल मीडिया पर फिलहाल समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी बहस जारी है। एक पक्ष उन्हें पर्यावरण संरक्षण की प्रतीक मान रहा है, जबकि दूसरा उनके पुराने वीडियो और बयानों को आधार बनाकर सवाल उठा रहा है। ऐसे में पेड़ कटान के विरोध से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पर्यावरण के साथ-साथ सोशल मीडिया और वैचारिक विवाद का भी विषय बन गया है।




