आस्थाउत्तराखंड

तो क्या अय्याशी का अड्डा बन रही है उत्तराखंड की नदियां और पहाड़

प्राकृतिक सौंदर्य के बीच अनुशासन और सुरक्षा की चुनौती

आस्था और अध्यात्म का अनूठा संगम उत्तराखंड की नदियां, तथा खिलखिले झरने और खूबसूरत पहाड़ी वादियां लंबे समय से देश-विदेश के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करती रही हैं। विशेषकर ऋषिकेश, हरिद्वार, मसूरी और नैनीताल जैसे स्थान दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद भी बने हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन के साथ-साथ अनुशासनहीनता, हादसों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही घटनाओं ने भी चिंता बढ़ाई है। अब उत्तराखंड की नदियों और पहाड़ियों को अधिकांश अय्याशियों का अड्डा समझा जाने लगा है, जो प्रदेश की धार्मिक मान्यताओं और आस्था पर भी कुठाराघात जैसा है , समय समय पर सामने आने वाले मामले उत्तराखंड वासियों की चिंता को बढ़ा देते हैं,

*पर्यटन का बढ़ता दबाव और बदलती तस्वीर*

कोविड-19 के बाद “रिवेंज ट्रैवल” के चलते उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या में तेजी आई। वीकेंड टूरिज्म का ट्रेंड बढ़ा, खासकर गुड़गांव, दिल्ली और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में युवा समूह यहां पहुंचने लगे। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को तो कह सकते हैं कि लाभ हुआ, लेकिन अनियंत्रित गतिविधियों ने कई जगहों पर सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन भी बिगाड़ा। नदियों के किनारे हादसे और लापरवाही की तस्वीरें भी सामने आती रहती है,राज्य आपदा प्रबंधन और पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, हर साल दर्जनों पर्यटक नदियों में बहने या डूबने की घटनाओं का शिकार होते हैं। गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे फोटो और वीडियो बनाने के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी आम बात बनती जा रही है।ऋषिकेश और हरिद्वार में कई बार ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें पर्यटक तेज बहाव वाली धारा के बेहद करीब जाकर स्टंट करते नजर आए। कुछ मामलों में ये घटनाएं जानलेवा साबित हुईं। प्रशासन द्वारा चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग के बावजूद नियमों का उल्लंघन जारी है।

वायरल वीडियो और विवादित व्यवहार

पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें पुरुष और महिला पर्यटक सार्वजनिक स्थानों पर नशे की हालत में अनुचित व्यवहार करते दिखे। इनमें नदी किनारे शराब पीना, तेज आवाज में म्यूजिक बजाना, स्थानीय संस्कृति की अनदेखी और आपसी झगड़े शामिल हैं।
विशेषकर ऋषिकेश और आसपास के इलाकों में गंगा तटों पर पार्टी करने और नियमों की अवहेलना के वीडियो सामने आए, जिन पर पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। कई बार पुलिस ने चालान काटे, वाहन जब्त किए और कुछ मामलों में गिरफ्तारियां भी कीं।

*लड़ाई-झगड़े और कानून-व्यवस्था की चुनौती*

पर्यटन सीजन में स्थानीय पुलिस को बाहरी पर्यटकों के बीच झगड़े, सड़क पर विवाद और होटल-रिसॉर्ट में मारपीट जैसी घटनाओं से भी जूझना पड़ता है। खासकर वीकेंड पर शराब के नशे में विवाद की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
कुछ चर्चित मामलों में पर्यटकों के बीच मामूली बात पर झगड़ा इतना बढ़ गया कि वीडियो वायरल हो गया और प्रशासन को सख्ती करनी पड़ी। इन घटनाओं ने राज्य की छवि पर भी असर डाला है।

*पर्यावरण पर असर*

अनियंत्रित पर्यटन का सबसे बड़ा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। नदियों के किनारे प्लास्टिक कचरा, बोतलें और खाने-पीने का सामान फेंकना आम हो गया है। पहाड़ी इलाकों में ट्रैफिक जाम, ध्वनि प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति रही, तो उत्तराखंड के संवेदनशील इकोसिस्टम को गंभीर नुकसान हो सकता है।

*प्रशासन की कार्रवाई और चुनौतियां*

उत्तराखंड पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने हाल के वर्षों में कई कदम उठाए हैं। इनमें:
संवेदनशील स्थलों पर पुलिस तैनाती बढ़ाना
शराब पीने और सार्वजनिक अशांति पर जुर्माना
खतरनाक स्थानों पर बैरिकेडिंग
ड्रोन और सीसीटीवी निगरानी
पर्यटकों के लिए गाइडलाइन जारी करना

हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए पर्यटकों की जागरूकता और जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।

*स्थानीय लोगों की चिंता*

स्थानीय निवासियों का कहना है कि पर्यटन से रोजगार मिलता है, लेकिन अनुशासनहीनता से सामाजिक माहौल प्रभावित होता है। कई जगहों पर धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की गरिमा भी प्रभावित हुई है।

उनका सुझाव है कि सरकार को “क्वालिटी टूरिज्म” पर ध्यान देना चाहिए, जहां पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति का सम्मान हो।

समाधान की दिशा में कदम

विशेषज्ञों के अनुसार, निम्न उपाय स्थिति को बेहतर बना सकते हैं:

संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या सीमित करना

सख्त जुर्माना और त्वरित कार्रवाई

पर्यटन स्थलों पर अनिवार्य गाइडलाइन

जागरूकता अभियान

स्थानीय समुदाय की भागीदारी

*एक हकीकत ये भी*

दिल्ली और आसपास से आए अधिकांश युवक और युवतियां उत्तराखंड की नदियों और पहाड़ों को अपने लिए नशे, और शारीरिक संबंध बनाने के लिए सबसे अच्छी जगह मानते हैं और परिवार की पाबंदियों से दूर यहां जमकर मौज मस्ती भी करना चाहते हैं उन्हें इस देवभूमि की धार्मिक भावनाओं से कोई लेना देना नहीं ।

 

-उत्तराखंड की नदियां और पहाड़ देश की अमूल्य धरोहर हैं। इन्हें केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ देखने की जरूरत है। बढ़ते पर्यटन के बीच अनुशासन, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

टिहरी की जिलाधिकारी निकिता खंडेलवाल ने देवभूमि उत्तराखंड की नदियों और आस्था को लेकर कहा कि गंगा और अन्य पवित्र नदियों के प्रति लोगों की श्रद्धा आज भी बेहद गहरी है। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर पर्यटन को बढ़ावा दे रही है तो दूसरी ओर “रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म” पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के संदेश के अनुरूप प्रदेश में ऐसा पर्यटन विकसित किया जा रहा है, जिसमें धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों की पवित्रता बनी रहे।
जिलाधिकारी ने माना कि कुछ असामाजिक तत्व पर्यटन स्थलों का गलत इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके खिलाफ समय-समय पर जिला प्रशासन द्वारा अभियान चलाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा स्वच्छता अभियान, नशा मुक्ति अभियान और पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम लगातार संचालित किए जा रहे हैं। पर्यटकों को जागरूक करने के लिए इको बैग वितरित किए गए हैं और होटल संचालकों को भी जिम्मेदार पर्यटन के लिए प्रेरित किया गया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को वैश्विक पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करते समय यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि स्थानीय लोग और बाहर से आने वाले पर्यटक दोनों देवभूमि की संस्कृति, आस्था और प्राकृतिक धरोहर का सम्मान करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button