
सिखों के पवित्र तीर्थ श्री हेमकुंट साहिब जी के कपाट शनिवार को श्रद्धा और भक्ति के बीच शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस अवसर पर करीब 5000 श्रद्धालुओं ने हेमकुंट साहिब पहुंचकर मत्था टेका और अरदास में भाग लिया। सुखमनी साहिब के पाठ और शबद-कीर्तन के बाद अंतिम अरदास की गई। इसके पश्चात श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को पूरे सम्मान और सत्कार के साथ शोभायात्रा के रूप में उनके शीतकालीन निवास सचखंड ले जाया गया। इस दौरान संगत ने ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इस वर्ष श्री हेमकुंट साहिब की यात्रा में भारत सहित अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, यूरोप, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर और दुबई समेत कई देशों से श्रद्धालु पहुंचे। समारोह का विशेष आकर्षण पाकिस्तान से आए 48 तीर्थयात्रियों का जत्था रहा, जिसने पवित्र गुरुद्वारे के दर्शन कर कपाट बंद होने के ऐतिहासिक अवसर में सहभागिता की। हल्की बर्फबारी के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई और बड़ी संख्या में संगत ने प्रतिकूल मौसम के बीच दर्शन किए।
गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन सरदार नरिंदरजीत सिंह बिंद्रा ने यात्रा को सफल बनाने में सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं, भारतीय सेना, राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में सभी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। शोभायात्रा का नेतृत्व गढ़वाल स्काउट्स बैंड और 418 इंडिपेंडेंट इंजीनियर कोर के जवानों ने किया। ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सरदार सेवा सिंह ने भी संगत और गुरुद्वारों के सेवादारों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने बताया कि रतूड़ा गुरुद्वारा भी संगत के लिए खुल गया है।
कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष की श्री हेमकुंट साहिब यात्रा का समापन हो गया। अब श्रद्धालु अगले वर्ष ग्रीष्मकाल में यात्रा दोबारा शुरू होने की प्रतीक्षा करेंगे। आस्था, सेवा और गुरु परंपरा के प्रति समर्पण के साथ संपन्न हुआ कपाट बंद समारोह संगत के लिए भावुक और यादगार अवसर रहा।



